पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी: ‘GoAdven India’ कैसे रोक रहा है सुदूर गांवों से पलायन?
उत्तराखंड की राजनीति और समाजशास्त्र में 'पलायन' एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। रोजगार के अवसरों के अभाव में सीमांत गांवों के युवा शहरों का रुख करते हैं। लेकिन चमोली जिले के लोहाजंग और आसपास के इलाकों में एक सुखद बदलाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय युवाओं को ट्रेकिंग और टूरिज्म से जोड़कर GoAdven India ने पलायन की रफ्तार पर ब्रेक लगाने का काम किया है।
लोकल एम्प्लॉयमेंट मॉडल: लोहाजंग से घेस-वाण तक असर
देहरादून मुख्यालय और लोहाजंग के बेस कैंप से काम कर रही यह संस्था बाहरी कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देती है। प्रसिद्ध Roopkund Trek और Brahmatal Trek के मुख्य रूट पर बसे गांवों के दर्जनों युवाओं को कुक, गाइड, पोर्टर और कैंप मैनेजर के रूप में प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी गई है।
"स्थानीय युवाओं को अपने घर पर ही मिले सम्मान" — प्रदीप कुनियाल
रोजगार और सामुदायिक विकास ...









