बीकेटीसी पदाधिकारियों ने कहा कि केदारनाथ धाम के गर्भ गृह के बारे में गलत खबर प्रसारित करने से देश – विदेश के श्रद्धालुओं के साथ ही बदरीनाथ व केदारनाथ धाम से जुड़े दानी दाताओं को भी ठेस पहुंची है ओर सनातन संस्कृति पर प्रहार कर रहा है “टूल किट गैंग”

बीकेटीसी पदाधिकारियों ने लगाया आरोप

श्री केदारनाथ धाम को लेकर सनातन संस्कृति पर प्रहार कर रहा है “टूल किट गैंग”

 

देहरादून: 20 जून

 

 

 

श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मन्दिर समिति ( बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने कहा कि केदारनाथ मंदिर गर्भ गृह में लगे स्वर्ण को पीतल बताना सनातन संस्कृति पर हमला है। इसके अलावा बीकेटीसी सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, राजपाल जड़धारी, भास्कर डिमरी, डॉ वीरेंद्र असवाल, महेंद्र शर्मा, पुष्कर जोशी, नंदा देवी, रणजीत सिंह राणा, जयप्रकाश उनियाल, कृपाराम सेमवाल आदि ने भी एक संयुक्त बयान में इसे टूल किट गैंग का दुष्प्रचार अभियान बताया है। कहा कि धर्मविरोधी मानसिकता के लोग पहले भी हिंदुओं के पवित्र धर्मस्थलों को निशाना बनाते रहे है‌।

बीकेटीसी पदाधिकारियों ने कहा कि दानी दाता ने निस्वार्थ भाव से श्री केदारनाथ मन्दिर को स्वर्ण दान किया तथा गर्भ गृह को स्वर्णमंडित किया। यह पूरा कार्य एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया। दानी दाता ने अपने स्तर से अपने ज्वैलर्स के माध्यम से यह पूरा कार्य सम्पन्न कराया। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी बोर्ड बैठक में व्यापक विचार – विमर्श के बाद दानी दाता को अनुमति प्रदान की गयी थी।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग एक षड्यंत्र के तहत प्रचारित कर रहे हैं कि केदारनाथ गर्भ गृह में 230 किग्रा सोना लगाया गया था। यह तथ्य बिलकुल भ्रामक है। उन्होंने बताया कि सोना लगने से पूर्व गर्भ गृह में चांदी की प्लेट लगी हुयी थीं, जिनका वजन करीब 230 किग्रा था। गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने में करीब 23 किग्रा सोना और लगभग एक हज़ार किग्रा ताम्बे का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित है कि स्वर्ण मंडित करने की प्रक्रिया के दौरान तांबे की प्लेट के ऊपर से ही सोने का बर्क चढ़ाया जाता है।

बीकेटीसी पदाधिकारियों ने कहा कि केदारनाथ धाम के गर्भ गृह के बारे में गलत खबर प्रसारित करने से देश – विदेश के श्रद्धालुओं के साथ ही बदरीनाथ व केदारनाथ धाम से जुड़े दानी दाताओं को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी की संपूर्ण व्यवस्था दानी दाताओं के सहयोग से चलती है। दान से प्राप्त राशि से ही बीकेटीसी अपने सभी मंदिरों का प्रबंधन करती है। इसके साथ संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए छात्रों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए विद्यालयों व महाविद्यालयों का संचालन करती है। श्रद्धालुओं को न्यूनतम शुल्क पर धर्मशालाओं की व्यवस्था करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के दुष्प्रचार का दानी दाताओं पर भी असर पड़ेगा।

 

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