Sunday, October 25News That Matters



सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्य पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं    

 

सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्य पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं

 

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में मेधावी छात्र सम्मान समारोह में उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट के 75 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। अमर उजाला समाचार पत्र द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मान समारोह के माध्यम से अमर उजाला प्रतिवर्ष हमारे राज्य के प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मानित हो रहे सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थी राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। अपने माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय के साथ ही इन विद्यार्थियों ने उत्तराखंड का मान भी बढ़ाया है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार निरतंर प्रयासरत है। सरकार द्वारा क्वालिटी एजुकेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्य पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश में 226 विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। 500 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं तथा 840 नए विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में स्मार्ट क्लासरूम भी स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के 6 से 12वीं कक्षा तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से प्रत्येक माह छात्रवृत्ति दी जा रही है। बच्चों के व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखण्ड के 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजने की शुरुआत की गई है। माध्यमिक विद्यालयों में 8 ट्रेड्स में व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गई है, जिससे 42 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सरकार द्वारा स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी भाषाओं में पुस्तकें तैयार की गई हैं। ’हमारी विरासत’ पुस्तक के माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भारत की संस्कृति, लोक परंपरा और महान विभूतियों से परिचित कराने का कार्य भी किया जा रहा है। बच्चों में कौशल, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित करने के लिए ’कौशलम कार्यक्रम’ भी प्रारंभ किया गया है।

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इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी, सलाहकार संपादक अमर उजाला श्री उदय कुमार, अमर उजाला के देहरादून संपादक श्री अनूप वाजपेयी, यूनिट हेड श्री पंकज शर्मा उपस्थित थे।

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